Delail-i Hayrat
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अल्लाह के नाम से, जो अत्यन्त कृपाशील, विशेष दयालु है। अल्लाह तआला हमारे आका मुहम्मद, उनकी आल और उनके सहाबा पर दरूद व सलाम नाज़िल फ़रमाए। ऐ अल्लाह! तेरे नबी, हमारे आका मुहम्मद (उन पर शांति हो) की उस प्रतिष्ठा के वसीले से जो उनके लिए तेरे पास है, और उस मुहब्बत के वसीले से जो तू उनसे करता है और वे तुझसे करते हैं, और उस रहस्य के वसीले से जो तेरे और उनके बीच है, मैं तुझसे विनती करता हूँ कि तू उन पर, उनकी आल और उनके सहाबा पर दरूद व सलाम नाज़िल फ़रमा। मेरे दिल में उनकी मुहब्बत को कई गुना बढ़ा दे। उनके सदक़े और उनके ऊँचे मक़ामात के वसीले से मुझे उनकी सच्ची पहचान अता कर। उनके तरीक़े पर चलने, उनके अदब और उनकी सुन्नत पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। इस पर मुझे दृढ़ता प्रदान कर। मुझे इज़्ज़त दे कि मैं रसूल (उन पर शांति हो) का दीदार कर सकूँ। मुझे खुश कर कि मैं उनसे हमकलाम हो सकूँ। मुश्किलों, रुकावटों, वसीलों और पर्दों को दूर कर दे। मेरे कानों को उनके मीठे ख़िताब से हिस्सा दे। ऐ अल्लाह! मुझे रसूल (उन पर शांति हो) के इल्म और मारिफ़त से लाभ उठाने की इजाज़त दे… उन पर मेरी सलात को ऐसा मुकम्मल, पाक, चमकदार नूर बना दे जो हर ज़ुल्म, अंधेरा, शक, शिर्क, कुफ्र, बातिल और गुनाह को मिटा दे। और उस सलात को मेरे तज़किये का कारण बना दे। इन बरकतों के ज़रिये मुझे इख़लास के मक़ाम की बुलंदी तक पहुँचा दे, ताकि मेरे भीतर कोई संदेह न रहे कि इबादत केवल तेरे सिवा किसी और के लिए नहीं। इस तरह मुझे अपने हुज़ूर का योग्य बना और मुझे अपने क़रीबी दोस्तों में शामिल कर। मुझे तौफ़ीक़ दे कि मैं यह सब करते हुए हमेशा रसूल (उन पर शांति हो) के अदब और सुन्नत को मज़बूती से थामे रहूँ और उनकी नूरानी शख़्सियत से मदद चाहता रहूँ। ऐ अल्लाह! ऐ नूर! ऐ हक़! ऐ ज़ाहिर! ऐ अल्लाह! ऐ नूर! ऐ हक़! ऐ ज़ाहिर! ऐ अल्लाह! ऐ नूर! ऐ हक़! ऐ ज़ाहिर!

ऐ अल्लाह! रूहों के बीच हमारे आका मुहम्मद की रूह पर, जिस्मों के बीच उनके जिस्म पर, क़ब्रों के बीच उनकी क़ब्र पर, और उनकी आल व सहाबा पर दरूद व सलाम नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! जब भी उन्हें याद करने वाले उनका ज़िक्र करें, हमारे आका मुहम्मद पर दरूद व सलाम नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! उन्हें याद करने से ग़ाफ़िल रहने वालों की गिनती के बराबर, हमारे आका मुहम्मद पर दरूद नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! उम्मी नबी, हमारे आका मुहम्मद पर, उनकी अज़्वाज—उम्महातुल-मुमिनीन—उनकी औलाद और उनके अहले-बैत पर अनंत दरूद व सलाम नाज़िल फ़रमा; उन पर सलामती और बरकत अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! तेरे इल्म में समाई हुई और क़ुरआन-ए-करीम में बयान की गई हक़ीक़तों की गिनती के बराबर, हमारे आका मुहम्मद पर वही दरूद नाज़िल फ़रमा जिससे तू रज़ी हो और जो उनके लायक़ हो। उन्हें मक़ाम-ए-वसीला (al-Wasīla), फ़ज़ीलत और बुलंद दर्जा अता फ़रमा। ऐ अल्लाह! उन्हें उस मक़ाम-ए-महमूद (al-Maqām al-Maḥmūd) तक पहुँचा दे जिसका तूने वादा किया है। उन्हें उनके लायक़ बदला अता फ़रमा। और उनके तमाम भाइयों—नबियों, सिद्दीक़ों, शहीदों और सालेहों—पर भी दरूद नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर दरूद नाज़िल फ़रमा, और क़यामत के दिन उन्हें अपने सबसे क़रीब मक़ाम में जगह दे।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर दरूद नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! उन्हें इज़्ज़त, रज़ामंदी और सख़ावत का ताज पहना दे।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद को वही सबसे बेहतरीन चीज़ अता फ़रमा जो उन्होंने अपने लिए तुझसे माँगी। ऐ अल्लाह! किसी भी बंदे ने उनके लिए तुझसे जो सबसे बेहतरीन चीज़ माँगी, वह भी उन्हें अता फ़रमा। ऐ अल्लाह! क़यामत तक उनके लिए जो सबसे बेहतरीन चीज़ तुझसे माँगी जाएगी, वह भी उन्हें अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर; आदम, नूह, इब्राहीम, मूसा और ईसा पर; और इनके बीच के तमाम नबियों और रसूलों पर दरूद नाज़िल फ़रमा। अल्लाह का दरूद और सलाम उन सब पर हो। ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर; आदम, नूह, इब्राहीम, मूसा और ईसा पर; और इनके बीच के तमाम नबियों और रसूलों पर दरूद नाज़िल फ़रमा। अल्लाह का दरूद और सलाम उन सब पर हो। ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर; आदम, नूह, इब्राहीम, मूसा और ईसा पर; और इनके बीच के तमाम नबियों और रसूलों पर दरूद नाज़िल फ़रमा। अल्लाह का दरूद और सलाम उन सब पर हो।

ऐ अल्लाह! हमारे पिता आदम और हमारी माता हव्वा पर, तेरे फ़रिश्तों की सलात की गिनती के बराबर दरूद नाज़िल फ़रमा। ऐ अल्लाह! उन्हें सबसे बुलंद जन्नत-ए-फ़िरदौस में जगह दे और अपनी रहमत व करम से उन्हें सबसे ऊँची नेमतों से राज़ी कर दे।

ऐ अल्लाह! माता-पिता को उनकी औलाद के ज़रिये जो बदला तू देता है, उसमें से सबसे बेहतरीन बदला उन्हें अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका जिब्रील, मीकाईल, इसराफ़ील, अज़्राईल, अर्श उठाने वाले फ़रिश्तों, दूसरे फ़रिश्तों, मुक़र्रबून मक़ाम के फ़रिश्तों, और तमाम नबियों व रसूलों पर दरूद नाज़िल फ़रमा। अल्लाह का दरूद और सलाम उन सब पर हो। ऐ अल्लाह! हमारे आका जिब्रील, मीकाईल, इसराफ़ील, अज़्राईल, अर्श उठाने वाले फ़रिश्तों, दूसरे फ़रिश्तों, मुक़र्रबून मक़ाम के फ़रिश्तों, और तमाम नबियों व रसूलों पर दरूद नाज़िल फ़रमा। अल्लाह का दरूद और सलाम उन सब पर हो। ऐ अल्लाह! हमारे आका जिब्रील, मीकाईल, इसराफ़ील, अज़्राईल, अर्श उठाने वाले फ़रिश्तों, दूसरे फ़रिश्तों, मुक़र्रबून मक़ाम के फ़रिश्तों, और तमाम नबियों व रसूलों पर दरूद नाज़िल फ़रमा। अल्लाह का दरूद और सलाम उन सब पर हो।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर, तेरे जानने की गिनती के बराबर, तेरे जानने के वजन के बराबर, बल्कि तेरे कलिमात की गिनती के बराबर भी दरूद नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर ऐसा दरूद नाज़िल फ़रमा जो कभी कम न हो।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर ऐसा दरूद नाज़िल फ़रमा जो हमेशा तक कभी कम न हो; बल्कि अगर ज़माना ही खत्म हो जाए तब भी खत्म न हो।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर वही दरूद व सलाम नाज़िल फ़रमा जो तूने उन पर किया है; और उन्हें उनके लायक़ बदला अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर ऐसा दरूद नाज़िल फ़रमा जो उन्हें ख़ुश और प्रसन्न कर दे, और जिसके ज़रिये तू हमसे भी रज़ी हो जाए; और उन्हें उनके लायक़ बदला अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर—तेरे नूरों का समुंदर, तेरे रहस्यों की खान, तेरी वहदानियत को बंदों पर बयान करने वाले, तेरी हुक्मरानी के नीचे हर चीज़ के नायाब मोती, तौहीद के मक़ाम के इमाम, वजूद की ज़ीनत, तेरी हर रहमत का ख़ज़ाना, तेरे दीन का रास्ता, तेरी तौहीद की मिठास चखने वाले, इंसानियत का सार, हर मौजूद की वजह, मख़लूक़ की असल का असल, तेरे उजाले के नूर के क़रीब—ऐसी सलात नाज़िल फ़रमा जो तेरी बुलंद ज़ात के मौजूद रहने तक जारी रहे, और जब तू पर्याप्त समझे तभी खत्म हो; जो तुझे और उन्हें रज़ी करे और हमारे बारे में भी तेरी रज़ा का ज़रिया बने। ऐ अल्लाह, ऐ रब्बुल-आलमीन।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर, तेरे इल्म में छुपी हुई चीज़ों की गिनती के बराबर, और तेरे मुल्क के बाक़ी रहने तक बाक़ी रहने वाली सलात के साथ दरूद नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! तेरी मख़लूक़ की गिनती के बराबर, खुद तेरी रज़ा के बराबर, तेरे अर्श के वजन के बराबर, तेरे कलिमात की गिनती के बराबर; और जितनी बार तेरी मख़लूक़ ने पहले तुझे याद किया है और आगे याद करेगी, उसके बराबर; हर साल, हर माह, हर जुमआ, हर दिन, हर रात, हर घड़ी; हर खुशबू लेने में, हर सांस में, आँख के हर झपकने में, हर जिव के आँख हिलाने में; अनंत की अनंतता तक, दुनिया और आख़िरत की अनंतता तक—बल्कि इन सब से कई गुना—हमारे आका मुहम्मद और उनकी आल पर दरूद नाज़िल फ़रमा और बरकत अता फ़रमा, जैसे तूने हमारे आका इब्राहीम की आल पर दरूद नाज़िल फ़रमाया और बरकत अता की। निस्संदेह तू हम्द के लायक़, अज़मत और शरफ़ वाला है।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर अपनी उनसे मुहब्बत के बराबर दरूद नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर अपनी लुत्फ़ और एहसान के बराबर दरूद नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर अपने यहाँ उनके शान के लायक़ और उनकी क़ीमत के मुताबिक दरूद नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर ऐसा दरूद नाज़िल फ़रमा कि उसके ज़रिये तू हमें हर आफ़त और हर डर से बचा ले, हमारी तमाम हाजतें पूरी कर दे, हमें हर गुनाह से पाक कर दे, हमें सबसे ऊँचे दर्जों तक उठा दे, और इस दुनिया में भी और मौत के बाद भी हमें हर भलाई के आख़िरी मक़सद तक पहुँचा दे।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर वही दरूद नाज़िल फ़रमा जिससे तू राज़ी हो, और उनके सहाबा से भी पूरी तरह राज़ी हो जा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर, उनकी आल और सहाबा पर—जिनका नूर तेरी मख़लूक़ में सबसे आगे है और जिनका वजूद तमाम आलमों के लिए रहमत है—ऐसा दरूद नाज़िल फ़रमा जो तेरी मख़लूक़ में अब तक जो भी गुज़रे हैं, उनमें नेक और बदबख़्त सबकी गिनती के बराबर हो; जो हर गिनती को समेट ले, जिसकी कोई हद न हो, जिसका कोई अंत न हो, जो कभी खत्म न हो, और तेरी ज़ात के साथ हमेशा कायम रहे। और उन पर पूरी सलामती भी नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर—जिनके दिल को तूने अपनी जलाल सिफ़त से और जिनकी आँख को तूने अपनी जमाल सिफ़त से भर दिया; और जिन्हें तूने मदद व नुसरत की नेमत देकर खुश किया—उन पर, उनकी आल और सहाबा पर दरूद नाज़िल फ़रमा; और उन पर पूरी तरह सलाम भी नाज़िल फ़रमा। तमाम हम्द सिर्फ़ अल्लाह ही के लिए है।

ऐ अल्लाह! हमारे आका और दिलों के सुल्तान मुहम्मद पर, ज़ैतून के पत्तों और तमाम फलों के पत्तों की गिनती के बराबर दरूद नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका और दिलों के सुल्तान मुहम्मद पर, जितने पहले हो चुके और जितने आगे होंगे उनकी गिनती के बराबर; और जितनी जानी-बेजानी मख़लूक़ को रात अंधेरा करती है और दिन रौशन करता है, उन सबकी गिनती के बराबर दरूद नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका और दिलों के सुल्तान मुहम्मद पर, उनकी आल पर, उनकी पाक बीवियों पर, और उनकी औलाद पर, उनकी उम्मत की गिनती के बराबर दरूद नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका पर पढ़ी जाने वाली सलावत की बरकत के सदक़े, हमें दुनिया और आख़िरत में उन लोगों में से कर दे जो इन दुरूदों के ज़रिये निजात पाते हैं; जो उनके हौज़-ए-कौसर तक पहुँचते और उससे पीते हैं; जो उनकी इताअत करते और उनकी सुन्नत पर अमल करते हैं। ऐ अल्लाह, ऐ रब्बुल-आलमीन! क़यामत के दिन उनके और हमारे बीच कोई परदा न रखना। हमें, हमारे माता-पिता को और तमाम मुसलमानों को बख़्श दे। तमाम हम्द आलमों के रब्ब अल्लाह ही के लिए है। (दूसरे तिहाई की शुरुआत)

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद और उनकी आल पर लगातार, नूरानी दरूद व सलाम नाज़िल फ़रमा—जो तेरी दी हुई आसानी से नबी बनाकर भेजे गए, जिन्होंने अपना फ़र्ज़ पूरा किया, नबियों और रसूलों में सबसे अफ़ज़ल और सबसे बुलंद, तेरी मख़लूक़ में सबसे बेहतरीन; वही जो आफ़ाक़ के चिराग़ हैं जिनके ज़रिये नबी, रसूल, फ़रिश्ते और औलिया तुझ तक पहुँचते हैं।

ऐ अल्लाह! अपने आयत में सराहे गए, तेरी शरीअत की रस्सी को थामने वाले दावत देने वालों में सबसे शरफ़ीले, नबियों और रसूलों के आख़िरी—हमारे आका मुहम्मद पर और उनकी आल पर ऐसा दरूद व सलाम नाज़िल फ़रमा जो हमें दुनिया और आख़िरत में उनके आम फ़ज़्ल तक, और तेरी उस करम-नवाज़ी तक पहुँचा दे जिससे तू राज़ी हो। बरकत अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर और उनकी आल पर—जो करम वालों में सबसे करम वाले, हिदायत के रास्तों की तरफ बुलाने वालों में सबसे शरफ़ीले, और हर सरज़मीन व बस्ती के चिराग़ हैं—ऐसा दरूद व सलाम नाज़िल फ़रमा जो कभी खत्म न हो, हमेशा बढ़ता रहे, और हमें भी तरह-तरह की नेमतों और इनामों तक पहुँचा दे। बरकत अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! जिनका मक़ाम बुलंद है और जिनकी ताज़ीम व एहतराम वाजिब है—हमारे आका मुहम्मद पर और उनकी आल पर ऐसा दरूद व सलाम नाज़िल फ़रमा जो हमेशा के लिए न कटे, बल्कि गिनतियों से भी न गिना जा सके। बरकत अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! तमाम आलमों में जैसे तूने हमारे आका इब्राहीम और उनकी आल पर दरूद नाज़िल फ़रमाया, वैसे हमारे आका मुहम्मद और उनकी आल पर भी दरूद नाज़िल फ़रमा। निस्संदेह तू हम्द के लायक़, अज़मत और शरफ़ वाला है। ऐ अल्लाह! उन्हें याद करने वालों के हर याद करने पर, और उनके नाम के ज़िक्र से गाफ़िल होने वालों की हर गफलत पर, हमारे आका मुहम्मद और उनकी आल पर दरूद नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! जैसे तूने हमारे आका इब्राहीम और उनकी आल पर दरूद, रहमत और बरकत अता की, वैसे हमारे आका मुहम्मद और उनकी आल पर भी दरूद नाज़िल फ़रमा, रहमत फ़रमा और बरकत अता फ़रमा। निस्संदेह तू हम्द के लायक़, अज़मत और शरफ़ वाला है।

ऐ अल्लाह! हमारे आका मुहम्मद पर—जो ज़ाहिर व बातिन दोनों तौर पर पाक और पाक किए गए हैं, और उम्मी नबी हैं—और उनकी आल पर दरूद नाज़िल फ़रमा; और सलाम भी नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! उस ज़ात पर सलाम नाज़िल फ़रमा जिनके ज़रिये तूने नुबूवत को ख़त्म फ़रमाया; और जिन्हें हौज़-ए-कौसर और शफ़ाअत का हक़ देकर तूने मदद और क़ुव्वत अता की।

ऐ अल्लाह! हुक्म और हिकमत के नबी, सबसे रौशन चिराग़, सबसे बड़े अख़लाक़ से सजे हुए, मेराज के मालिक, आख़िरी नबी—हमारे आका मुहम्मद पर और उनकी आल पर, उनके सहाबा पर, और उनकी सीधी राह पर चलने वाले ताबेईन पर भी दरूद नाज़िल फ़रमा।

ऐ अल्लाह! इस्लाम के सितारों की राहों को—जो सख़्त अंधेरी और डरावनी रातों में रास्ता दिखाते हैं और अंधेरे के चिराग़ों की तरह हैं—हमारे आका के वसीले से अज़मत वाला बना दे। और हमारे आका और दिलों के सुल्तान मुहम्मद पर, उनकी आल पर, उनके सहाबा पर, और उनकी सीधी राह पर चलने वाले ताबेईन पर, समुद्र में लहरें उठती रहें और दूर-दराज़ से आने वाले हाजी काबा का तवाफ़ करते रहें, उसी वक़्त तक लगातार दरूद नाज़िल फ़रमा।

दरूद-ओ-सलाम में से सबसे अफ़ज़ल दरूद, अल्लाह के अज़ीम रसूल—जो बंदों में चुने हुए हैं, आख़िरत में मख़लूक़ के शफ़ीअ, मक़ाम-ए-महमूद और हौज़-ए-कौसर के मालिक, रिसालत और आम तबलीग़ का बोझ उठाने वाले, दीन व दुनिया के कामों में कोशिश का शरफ़ पाने वाले—हमारे आका मुहम्मद पर हो।

अल्लाह तआला उन पर और उनकी आल पर रात-दिन जारी रहने वाला दरूद नाज़िल फ़रमाए।

हमारे आका मुहम्मद, अल्लाह का दरूद व सलाम उन पर हो, उनसे पहले पैदा किए गए और उनसे बाद पैदा किए जाने वालों के आका और सबसे अफ़ज़ल हैं।

दरूद पढ़ने वालों का सबसे अफ़ज़ल दरूद, सलाम देने वालों का सबसे बेहतरीन सलाम, ज़िक्र करने वालों का सबसे खूबसूरत ज़िक्र, अल्लाह की सलावतों में से सबसे अफ़ज़ल, सबसे खूबसूरत, सबसे मुकम्मल, सबसे ज़्यादा, सबसे पूरा और बे-नुक़्स, सबसे वाज़ेह, सबसे बुलंद, सबसे पाक, सबसे ताहिर, सबसे बरकत वाला, सबसे अच्छा, सबसे ज़्यादा बढ़ने वाला, सबसे काफ़ी, सबसे रौशन, सबसे आली, सबसे ज़्यादा, सबसे जमा हुआ, सबसे आम, सबसे दाइमी, सबसे बाक़ी रहने वाला, सबसे अज़ीज़, सबसे बरतर, सबसे अज़ीम, सबसे अफ़ज़ल, सबसे खूबसूरत, सबसे क़ीमती, सबसे करीम, सबसे मुकम्मल, सबसे तमाम, सबसे अज़मत वाला—ये सब दरूद अल्लाह की मख़लूक़ में सबसे अफ़ज़ल और उसकी मख़लूक़ के चुनिंदा हमारे आका मुहम्मद पर हो। और ये तमाम सलावतें अल्लाह की मख़लूक़ में सबसे अफ़ज़ल, सबसे खूबसूरत, सबसे अच्छी, सबसे सखी, सबसे मुकम्मल, सबसे तमाम, अल्लाह के नज़दीक सबसे क़ीमती; अल्लाह के रसूल, नबी, हबीब; अल्लाह के चुने हुए और अल्लाह के हुज़ूर हमेशा मुनाजात करने वाले रसूल; अल्लाह के ख़ास दोस्त, नाफ़रमानी से दूर दोस्त; अल्लाह के अहकाम को भरोसे के साथ पूरा करने वाले अमीन; अल्लाह के बंदों में से चुने हुए, उसकी मख़लूक़ में से खास करके निकाले गए, नबियों में से ख़ालिस और सबसे चुने हुए बंदे—हमारे आका मुहम्मद पर हो। और ये तमाम सलावतें अल्लाह की सबसे मज़बूत रस्सी हैं जिससे बंदे निजात पा सकते हैं; अल्लाह के सबसे मासूम बंदे पर; अल्लाह की अपने बंदों पर नेमत, रहमत की कुंजी; रसूलों में चुने हुए, अल्लाह के बंदों में सबसे बरगुज़ीदा; जो अपनी मर्ज़ी हो या न हो, हर हाल में अपनी मुराद तक पहुँचते हैं; अता की गई नेमतों में इख़लास वाले; सबसे बुलंद नबी; सबसे सच्चे; जिनकी शफ़ाअत निजात देने वाली है; शफ़ाअत का हक़ पाए हुओं में सबसे अफ़ज़ल; सौंपे गए अमानतों में अमीन; तबलीग़ की गई बातों में सच्चे; अपने रब के हुक्म को बयान करने वाले; सबसे भारी ज़िम्मेदारी उठाने वाले; अल्लाह तक पहुँचने में रसूलों में अल्लाह के सबसे क़रीब; क़यामत के दिन मक़ाम और फ़ज़ीलत के एतबार से नबियों में सबसे बुलंद; और नबियों में सबसे ज़्यादा करम वाले—हमारे आका मुहम्मद पर हो। और ये तमाम सलावतें अल्लाह के नज़दीक सबसे पाक; अल्लाह के यहाँ नबियों में सबसे महबूब; दर्जे के एतबार से अल्लाह के यहाँ नबियों में सबसे क़रीब; सबसे ज़्यादा अज्र व सवाब पाने वाले; अल्लाह के बंदों में सबसे करीम; अल्लाह के नज़दीक नबियों में सबसे ज़्यादा रज़ा पाने वाले; दर्जे और मक़ाम के एतबार से इंसानों में सबसे बुलंद; जगह के एतबार से उनमें सबसे बड़े; ख़ूबसूरती और फ़ज़ीलत के लिहाज़ से इंसानों में सबसे मुकम्मल; दर्जे के लिहाज़ से नबियों में सबसे अफ़ज़ल; लाए हुए क़ानूनों के एतबार से नबियों में सबसे मुकम्मल; नस्ल के एतबार से नबियों में सबसे शरीफ़; बोलने और ख़िताब के लिहाज़ से नबियों में तबलीग़ को सबसे बेहतर तरीके से बयान करने वाले; पैदा होने, हिजरत, नसब और सहाबा के एतबार से नबियों में सबसे अफ़ज़ल; नसब के एतबार से लोगों में सबसे बरतर; क़बीले के एतबार से लोगों में सबसे ज़्यादा शरीफ़; तमाम इंसानों और नबियों में ख़ुद सबसे बेहतरीन; जिनका दिल वसवसों से पाक कर के नूर और हिकमत से भर दिया गया; इंसानों और नबियों में सबसे सच्चे; और अमल के लिहाज़ से सबसे पाक—हमारे आका मुहम्मद पर हो। और ये तमाम सलावतें शराफ़त के एतबार से लोगों में सबसे साबित-क़दम; अहद की वफ़ा के लिहाज़ से नबियों में सबसे आगे; शरफ़ के लिहाज़ से सबसे मुतइन; तबीयत के एतबार से सबसे मुकर्रम; ख़िल्क़त में सबसे ख़ूबसूरत; औलाद में सबसे पाक; सुनने और इताअत में इलाही अहकाम का सबसे ज़्यादा फ़रमाबरदार; मक़ाम के एतबार से सबसे बुलंद; बयान के लिहाज़ से नबियों में सबसे शिरीं-क़लाम; सलाम में सबसे ज़्यादा; क़द्र के लिहाज़ से सबसे ज़्यादा तारीफ़ के क़ाबिल; आला सिफ़ात के साथ लोगों में सबसे ज़्यादा सराहे जाने वाले; बेहतरीन अख़लाक़ के साथ सबसे ज़्यादा पसंदीदा; मुक़र्रबून के मक़ाम में अल्लाह के सबसे क़रीब फ़रिश्तों और नबियों में सबसे ज़्यादा ज़िक्र किए जाने वाले; अहद की वफ़ा में लोगों में सबसे आगे; वादा करने में सबसे ज़्यादा सच्चे; लोगों में सबसे ज़्यादा शुक्रगुज़ार; काम के लिहाज़ से सबसे बरतर; सब्र में सबसे ख़ूबसूरत; ख़ैर के लिहाज़ से लोगों में सबसे अच्छे; और आसानी के सबसे क़रीब—हमारे आका मुहम्मद पर हो। और ये तमाम सलावतें जगह के एतबार से इतनी दूर कि लोग पहुँच न सकें; शान में सबसे बुलंद; दलील में सबसे मज़बूत; क़यामत के दिन मीज़ान में लोगों में ख़ैर के एतबार से सबसे भारी और सबसे पसंदीदा; ईमान के लिहाज़ से लोगों में सबसे पहले; मुख़ातबों को मुराद समझाने में अपनी बात को सबसे वाज़ेह अदा करने वाले; ज़बान में सबसे फ़सीह; दलील और हुज्जत के लिहाज़ से अपना हुक्म मनवाने में लोगों में सबसे बरतर—हमारे आका मुहम्मद पर हो।

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